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शोध प्रकाशन / पत्रिकाएँ पठन सामग्री
शोधार्थी
संकाय

    श्री शिवराज एस हुछनवार

     

     

     

     

     

    श्री शिवराज एस हुछनवार

    शैक्षणिक योग्यता
    श्री शिवराज एस हुछनवार ने अपना बीएएलएलबी कर्नाटक विश्वविद्यालय धारवाड़ से 2010 में किया। उन्होंने अपना एलएलएम संवैधानिक कानून में कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय (के.एस.एल.यू) से 2012 में किया। अपनी परास्नातक परीक्षा में उन्होंने विश्वविद्यालय में स्वर्णपदक (ना.नी.ए. पालखीवाला स्मृति स्वर्ण पदक) के साथ प्रथम श्रेणी में प्राप्त किया। उन्होंने यूजीसी नेट (जे आर एफ) कई बार उत्तीर्ण किया।

    शिक्षण अनुभव
    उनके पास दो वर्षों से भी अधिक का शिक्षण अनुभव है और उन्होंने विधि के विभिन्न विषय अधोस्नातक एवं परास्नातक दोनों ही विधि पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय ख्याति के संस्थाओं में पढ़ाया है- जैसे - के.एल.ई सोसाइटी का विधि महाविद्यालय, बैंगलोर और के.एस.एल.यू. का विधि विद्यालय, हुबली।

    शोध योगदान
    उन्हें विभिन्न विधि पत्रिकाओं (जर्नल) में निम्नलिखित शोध - लेख प्रकाशित करने का श्रेय प्राप्त है। उन्होंने दो आदर्श (माड्यूल्स) का योगदान यू.जी.सी. परास्नातक को दिया है ई-पाठशाला (एम.एच.आर.डी. कार्यक्रम) यू.जी.सी. द्वारा ये माइमूल आनलाइन अपलोड किए जाने वाला हैं।

    शोध प्रकाशन
    1. एक सहलेखित लेख -शीर्षक ’’भारत में विधिक प्रणाली : समकालीन समस्याएँ’’ के एल.ई. विधि जर्नल बैंगलोर में प्रकाशित संख्या आई.एस.एस.एन : 2348-2834
    2. एक लेख- शीर्षक ’’बहुसांस्कृतिक समाज में सांस्कृतिक कशमकश’’ समाज शास्त्र में अध्ययन एवं शोध ग्रामीण सामाजिक दस्तावेजीकरण केन्द्र विभाग टुमकुर विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित- संख्या आई.एस.बी.एन. 978-93-82694-05-2
    3. एक लेख -शीर्षक ’’भारत में कानून का नियम’’, विधि सेवा भारत आनलाइन विधि जर्नल- में प्रकाशित, आईएस.बी.एन. संख्या- 978-93-82417-01-9
    4. शोध पत्र, शीर्षक ’’प्राचीन भारत में विधिक प्रणाली’’- विधि सेवा भारत आनलाइन विधि जर्नल में प्रकाशित आई.एस.बी.एन. संख्या 978-93-82417-01-9
    5. लेख-शीर्षक ’’भारत में वर्तमान न्याय निष्पादन प्रणाली के सच्चे विकल्प की खोज में’’ नलसार ला रिव्यू भाग-7 में प्रकाशित, आई.एस.एस.एन. संख्या 2319-1988
    6. एक सहलेखित लेख : शीर्षक ’’भारत में न्याय प्रणाली से बाहर उपचार : पूर्व एवं वर्तमान’’ - विधि सेवा भारत आन लाइन विधि जर्नल में प्रकाशित, आई.एस.बी.एन. संख्या 978-93-82417-01-9
    7. एक सह लेखित लेख -शीर्षक ’’भारतीय संविधान में प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्त’’- विधि सेवा भारत आनलाइन विधि जर्नल, आई.एस.बी.एन : 978-93-82417-01-9
    8. एक सह लेखित लेख-शीर्षक ’’प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अपवाद’’ विधि सेवा भारत आनलाइन विधि जर्नल में प्रकाशित, आई.एस.बी.एन. संख्या : 978-93-82417-01-9
    9. एक सहलेखित लेख -शीर्षक ’’प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत स्रोत एवं विकास’’- विधि सेवा भारत आनलाइन विधि जर्नल में प्रकाशित, संख्या आई.एस.बी.एन. संख्या 978-93-82417-01-9

    प्रदत्त आदर्श
    1. आदर्श 7- विधि पत्र का दर्शन का ’’प्राकृतिक न्याय की भूमिका’’ पर
    2. आदर्श 5 - विधि पत्र का दर्शन का ’’पारम्परिक और आधुनिक प्राकृतिक विधि सिद्धांत’’ पर पत्र प्रस्तुत-शीर्षक ’’अच्छे शासन में मुखबिर की भूमिका’’ - समकालीन परिपेक्ष्य में विधि एवं शासन पर राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत पत्र (श्रीराम कालेज आफ ला मुजफ्फरपुर, 2015) द्वारा आयोजित
    3. ’’अन्तर्राष्ट्रीय कानून में मौलिक मानवाधिकार के रूप में स्वस्थ पर्यावरण’’ पर अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में इंडो यू.के. परिपेक्ष्य में ’’लोक एवं क्रियाकलाप विधि’’ पर पत्र प्रस्तुत किया जो विधि विभाग बैंगलोर विश्वविद्यालय ने ब्रिटिश कौंसिल चैन्नई के सहयोग से 2014 में आयोजित किया।
    4. ’’भारत में विधिक शिक्षा पर पुनर्विचार पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2012 में’’ प्राचीन भारत में विधिक व्यवस्था पर पत्र प्रस्तुत किया।
    5. ’’संस्कृति और समाज : परिवर्तन, चुनौतियाँ, और रणनीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन में बहु सांस्कृतिक समाज में सांस्कृतिक कशमकश’’, नामक शीर्षक से 2012 में पत्र प्रस्तुत किया। सी.एम.आर. विधि विद्यालय बैंगलोर द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय मध्यस्थता सम्मेलन में ’भारत में न्याय प्रणाली के बाहर उपचार : पूर्व और वर्तमान’’ नामक शीर्षक से पत्र के रूप में योगदान दिया।

    आमंत्रित व्याख्यान
    1. उन्होंने के.एल.ई. सोसाइटी के विधि महाविद्यालय चिकोड़ी में 2010-2014 में ’’मौलिक अधिकार एवं राज्य नीति के दिशानिर्देश सिद्धांतों के बीच अन्तः संबंध’’ पर विशेष व्याख्यान दिए।
    2. के.के. इंग्लिश मीडियम स्कूल चिकोडी में 2013 में 150 वीं जन्म दिन समारोह के आयोजन पर "स्वामी विवकानन्द का मानवता को योगदान’’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिए।