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    श्रुति जेन यूसेबियस

     

     

     

     

     

    श्रुति जेन यूसेबियस

    सुश्री जेन यूसेबियस ने अपनी बी.एस.एल.एल.बी. की उपाधि आई.एल.एस. ला कालेज पुणे से वर्ष 2008 में पूर्ण की। उनके पास ’एविंग क्रिश्चियन कालेज, इलाहाबाद’’ से अपनी स्नातक उपाधि भी है।

    सुश्री यूसेबियस मार्च 2012 में राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से जुड़ी। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से जुड़ने के पूर्व सुश्री यूसेबियस ने वर्ष 2008-2009 में सहायक प्रबन्धक-परोक्ष कर के रूप में हस्किन्स एंड सेल्स मुम्बई में कार्य किया।

    सुश्री यूसेबियस को तीन प्रकाशनों का श्रेय जाता है -

    • ’’मन्द मृत्यु और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अन्तर्गत मृत्यु का अधिकार’’ जिसे राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय भोपाल (आई.एस.एस.एन. 2229-7960) द्वारा जर्नल भारतीय विधि समीक्षा भाग 5, 2012 में प्रकाशित किया गया।
    राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा सूचना पत्र भाग - 3, अंक 1 जनवरी 2013 में प्रकाशित संक्षिप्त लेख शीर्षक ’’भारतीय दण्ड संहता, 1860 के अनुभाग 376 की तुलना में फैसला सुनाने का अभ्यास’’
    राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा प्रकाशित सूचना पत्र भाग 3 अंक 2, जुलाई 2013 में प्रकाशित संक्षिप्त लेख- शीर्षक ’’महिलाओं के विरूद्ध हिंसा- न्यायिक प्रतिक्रिया’’ राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में सभी स्तर के न्यायाधीशों के लिए विधि के विभिन्न क्षेत्रों को लेते हुए सम्मेलनों की रूप रेखा बनाने और संचालन करने में संलग्न रही है।

    सुश्री यूसेबियस ने कनिष्ठ प्रभाग के नव नियुक्त कनिष्ठ न्यायाधीशों और अतिरिक्त न्यायाधीशे के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रत संचालित करने के सुश्री यूसेबियस ने निम्नलिखित कार्यक्रम संचालित किए हैं।

    - संवैधानिक एवं प्रशासनिक विधि में विधि का विकास।
    - किशोर न्याय।
    - महिलाओं और बच्चों से संबंधित कानून।
    - परिवार न्यायालय।
    - न्यायिक गुण, प्रवृत्ति एवं कौशल।
    - कमजोर वर्ग और अधिकारहीन समूहों (विपरीत लिंगी, मानसिक विकलांग, भिन्न रूप से समर्थ और वरिष्ठ नागरिक) से संबंधित कानून।

    सुश्री यूसेबियस वर्ष 2012 और 2013 में श्रीलंका से आए न्यायाधीशों के लिए अकादमी कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने और संचालन कर में संलग्न रही हैं।
    सुश्री यूसेबियस सम्पादकीय दल की सदस्य रही है जिसने एन.जे.ए. का सूचना पत्र भाग- 3 अंक 1 एवं 2 तैयार किए है।