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    श्रुति जेन यूसेबियस

     

     

     

     

     

    श्रुति जेन यूसेबियस

    सुश्री श्रुति जेन यूसेबियस ने अपनी बी.एस.एल. एल.एल.बी. की उपाधि आई.एल.एस. ला कालेज, पुणे और एल.एल.एम. बार्कतुल्ला विश्वविद्यालय से पूर्ण की। उन्होंने वर्ष 2018 में यूजीसी राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा उत्तीर्ण की है। सुश्री यूसेबियस के पास ’’एविंग क्रिश्चियन कालेज, इलाहाबाद’’ से शिक्षा में स्नातक की उपाधि भी है।

    सुश्री यूसेबियस मार्च 2012 में विधि सहयोगी के रूप में राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से जुड़ी और उन्हें 2018 में शोधकर्ता के रूप में चुना गया। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से जुड़ने के पूर्व सुश्री यूसेबियस ने सहायक प्रबन्धक के रूप में, परोक्ष कर हस्किन्स एंड सेल्स, मुम्बई में कार्य किया।

    राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में, सुश्री यूसेबियस सिविल न्यायाधीशों जूनियर डिवीजन, अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों, प्रिंसिपल जिला न्यायाधीशों और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों सहित विभिन्न स्तरों पर न्यायाधीशों के लिए सम्मेलन तैयार करने और आयोजित करने में शामिल रही है। सुश्री यूसेबियस ने निम्नलिखित विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं –

    - संवैधानिक एवं प्रशासनिक विधि में विधि का विकास।
    - किशोर न्याय।
    - महिलाओं और बच्चों से संबंधित कानून।
    - परिवार न्यायालय।
    - एनडीपीएस न्यायालय ।
    - मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ।
    - न्यायिक गुण, प्रवृत्ति एवं कौशल।
    - न्यायालय प्रबंधन ।
    - आर्थिक अपराध ।
    - चुनाव कानून ।
    - पशु अधिकार कानून ।
    - कमजोर वर्ग और अधिकारहीन समूहों (विपरीत लिंगी, मानसिक विकलांग, भिन्न रूप से समर्थ और वरिष्ठ नागरिक) से संबंधित कानून।

    सुश्री यूसेबियस वर्ष 2012 और 2013 में श्रीलंका से आए न्यायाधीशों के लिए अकादमी कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने और संचालन कर में संलग्न रही हैं।

    सुश्री यूसेबियस को तीन प्रकाशनों का श्रेय जाता है -

    • ’’मन्द मृत्यु और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अन्तर्गत मृत्यु का अधिकार’’ जिसे राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय भोपाल (आई.एस.एस.एन. 2229-7960) द्वारा जर्नल भारतीय विधि समीक्षा भाग 5, 2012 में प्रकाशित किया गया।
    राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा सूचना पत्र भाग - 3, अंक 1 जनवरी 2013 में प्रकाशित संक्षिप्त लेख शीर्षक ’’भारतीय दण्ड संहता, 1860 के अनुभाग 376 की तुलना में फैसला सुनाने का अभ्यास’’
    राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा प्रकाशित सूचना पत्र भाग 3 अंक 2, जुलाई 2013 में प्रकाशित संक्षिप्त लेख- शीर्षक ’’महिलाओं के विरूद्ध हिंसा- न्यायिक प्रतिक्रिया’’